जाने वास्तु के अनुसार सोते वक्त किस दिशा में सिर रखना है लाभकारी

हमारी नींद से  हमारे जीवन का गहरा संबंध है। अच्छी नींद हमारी सेहत के लिए बहुत ज़रूरी है। सोने के संबंध में की गई लापरवाही सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है। नींद से जुड़ी ये बातें तो आपने सुनी ही होंगी। लेकिन शायद आपको ये नहीं मालूम होगा कि सोते वक्त सिर किस दिशा में हो, इस बात का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है। वास्तुशास्त्र में इस बात की जानकारी दी गई है कि किस दिशा में सिर करके सोना आपके लिए अच्छा साबित होगा। आइये जानें वास्तु के अनुसार सोते समय सिर की सही दिशा –

वास्तुशास्त्र आठ दिशाओं के असर की बात करता है। इन आठों दिशाओं में से हर एक दिशा की अपनी विशेषता है। विद्युत चुम्बकीय तरंगों का प्रवाह पृथ्वी की आंतरिक सतह में दक्षिण से उत्तर की ओर होता है, जबकी पृथ्वी की बाह्य सतह पर उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर होता है।  हमारी स्थिति पृथ्वी की बाह्य सतह पर होने के कारण इन चुंबकीय तरंगों का प्रवाह हमारे शरीर में भी उत्तर से दक्षिण की ओर ही होता है।

अगर हम उत्तर दिशा में सिर रखकर सोते हैं तो चुंबकीय तरंगे सबसे पहले हमारे सिर को छूती हैं और फिर वो शरीर में नीचे की ओर प्रवाहित होती हैं। आख़िर में ये तरंगे पैर की ओर से शरीर से बाहर निकलती है। इस तरीके से ये तरंगे हमारे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती हैं। इससे ब्लड सर्कुलेशम मस्तिष्क की स्थिति से विपरीत दिशा में होता है।

सोते हुए विद्युत चुंबकीय तरंगों का असर ज्यादा होता है। इसलिए वास्तुशात्र के अनुसार, सोते वक्त सिर दक्षिण में होना चाहिए। वास्तु में माना जाता है कि इस दिशा सिर करके सोने से धन और आयु की वृद्धि होती है। यदि दक्षिण में सिर रखना संभव ना हो तो पूर्व व पश्चिम में भी सिरहाना रखा जा सकता है। हालांकि कहा जाता है कि इस दिशा में सिर करके सोने से चिंता ज्यादा होती है। इसलिए अगर आपको आमतौर पर तनाव रहता है तो इस दिशा में सिर करके न सोएं।

पूर्व की तरफ अगर आप सिर करके सोते हैं तो वास्तु के अनुसार विद्या आती है। इसलिए स्टूडेंट्स के लिए ऐसे सोना फायदेमंद हो सकता है। चारों दिशाओं की संधि अर्थात् आग्नेय, वायव्य आदि कोनों में सिरहाना रखने से बचना चाहिए।